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Thursday, 4 October 2012

तर्क की कसौटी


कहा था तूने
हाथ थाम ले चलेगा
नहीं छोड़ेगा कभी
देख !
सीने में धडकता है तू
दिखता तो है
पर नज़रों की हद से
बहुत दूर..
हाथों के खालीपन में
आँखों की वीरानी में
नहीं दिखता
तर्क की कसौटी पर .

20 comments:

  1. Replies
    1. तह-ए-दिल से शुक्रिया ..यशवंत जी

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  2. कल 07/10/2012 को आपकी यह खूबसूरत पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    1. नई-पुरानी-हलचल में पुन: शामिल होने पर मुझे बेहद ख़ुशी है ..
      आभार यशवन्त जी ..

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  3. सही कहा तर्क की कसौटी पर वास्तव में कुछ नहीं दिखता!

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    1. जबकि माना इसी कसौटी को सही जाता है ...
      आभार धीरेन्द्र जी ..

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  4. वंदना जी बहुत उम्दा
    .... हाथों के खालीपन में
    वाह

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    1. आपको अच्छा लगा पढ़कर , मुझे बहुत ख़ुशी हुई ..
      आभार भारत ..

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  5. Haan bahut kuchh kehte hain log. Par kya karte hain yeh zyaada matlab rakhta hai.

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    1. जी, सही ..आभार प्राणेश जी ..

      सादर

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  6. बहुत सुन्दर रचना वंदना जी....
    गहन भाव समेटे हुए...

    अनु

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    1. अक्सर उलझन बहुत गहन सोच तक ले जाती है ...
      आभार अनु .. उस हद तक महसूस करने के लिए ..

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  7. जहां तर्क होता है वहाँ दिल के दरवाजे बंद हो जाते हैं .... सुंदर अभिव्यक्ति

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    1. बहुत खूबसूरत ढंग से आपने तर्क को खारिज किया है ..
      आभार संगीता जी ..

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  8. गहन भाव व्यक्त करती सुन्दर रचना..
    :-)

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    1. आपके आगमन ने एक अच्छा अहसास दिया है मुझे ..
      आभार रीना जी ..

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  9. Replies
    1. आपकी टिप्पणी अनमोल है ..
      आभार ममता जी ..

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  10. बेहद करीब दिल को छूती,गहन और सुन्दर रचना !!!


    सादर

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