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Thursday, 10 May 2012



तुम्हारे आने से पहले 
तय था तुम्हारा जाना 
वक़्त मुक़र्रर था 

तुम आये सकुचाते ,रुके ,संवरे और निखर गए 
मेरी आँखों के आईने में 
अपना  अक्स  निहारा 
गरूर झाँक रहा था तुम्हारी आँखों से 
आखिर सबसे हसीन मौसम का 
खिताब जो मिला था तुम्हे        
तुम्हारा खुद पर यूँ इतराना 
अच्छा लगा मुझे 
हर मौसम मेरा ही तो हिस्सा है 
वो पतझड़ भी ,जो अब आया है 
वो भी मेरा है 
तुम भी तो मेरे थे .
तुम बदल गए 
क्यों कि तुम्हे बदलना था 
मैं जानती थी 
बदलाव बनाया भी तो मैंने ही था 
तुम जाओ 
कि 
जाते मौसम का 
सोग नहीं मनाती मैं 
विलाप नहीं करती 
कभी कभी बरस जाती हूँ 
कि तपते दिल को राहत मिले 
बह जाती हूँ कि  ज़ख्म धुलें 
उठती हूँ गुबार बन के 
कि  न देखूं तुमको जाता 

प्रकृति होने की यह सजा 
खुद तय की है मैंने 
अपने लिए 

18 comments:

  1. जाते मौसम का
    सोग नहीं मनाती मैं /प्रकृति होने की यह सजा
    खुद तय की है मैंने
    अपने लिए

    मर्मस्पर्शी!

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  2. आखिर सबसे हसीन मौसम का
    खिताब जो मिला था तुम्हे
    तुम्हारा खुद पर यूँ इतराना
    अच्छा लगा मुझे
    हर मौसम मेरा ही तो हिस्सा है
    वो पतझड़ भी ,जो अब आया है ...हम्म! वाह मौसम का ऐसा इस्तेमाल ........मौसम खुद का कन्धा थपथपा रहा होगा |

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  3. Thankyou Deepak Bhappe ... jab tak aapka haath sar par hai ..har mausam suhaana hai ..

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  4. सच मैँ दीदी...प्रकृति होने
    की सजा.....निःशब्द हूँ।

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    1. Thankyou ..Dileep Bhaa..
      Aapki aamad achchhi lagii ..
      Aate rahiyegaa..

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  5. superr mam .....bahut sunder hai ......

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  6. bahut khoob maatey ............bahut hee badhiya .......

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  7. .मौसम बदलते हैं...और मौसम का आनंद तठस्थ हो कर नहीं साथ चल कर उठाया जाता है ...:))आपके मौसम के रंग यहाँ तक पहुँच रहे."हर मौसम मेरा ही तो हिस्सा है "

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    1. aapne toh kavita hi likh dee... Rajluxmi ..
      Thankyou ..

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  8. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं संजय भास्कर हार्दिक स्वागत करता हूँ.

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  9. कोई कोई सावन भी ऐसा निष्ठुर होता है
    कि एक बार चला जाये
    तो लौट कर नहीं अत
    लाख दिन फूंको
    लाख रातें जलाओ ...

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    1. Yahi Prakriti hai.. jo apne hii niyamo'm se bandhii hai ..Ashok Da

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  10. प्रकृति होने की यह सजा
    खुद तय की है मैंने
    अपने लिए !!!
    निः शब्द करती रचना, भावों का ऐसा अभिव्यक्तिकरण,आप ही कर सकती हैं ...


    सादर

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    1. तह-ए -दिल से शुक्रिया ..

      स्नेह

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